उत्तराखंड : विकराल हुई जंगलों की आग, नैनी झील में रोकनी पड़ी बोटिंग, यह हैं कारण ……

by intelliberindia

देहरादून/नैनीताल : उत्तराखंड में जंगलों की आग विकराल रूप लेती जा रही है। आलम यह है कि अब जंगल की आग से गांवों को भी खतरा हो रहा है। आग तेजी फैल रही है। गढ़वाल से लेकर कुमाऊं तक लगातार जंगलों में आग वन संपदा को तबाह कर रही है। इससे जहां सरकार पर सवाल खड़े हो रहे हैं। वहीं, वन विभाग की तैयारियों और दावों की पोल खुल गई है। राज्य में अब तक आग की 575 घटनाओं में 689.89 हेक्टेयर जंगल को नुकसान पहुंचा है। मुख्यमंत्री पुष्कर धामी ने कहा कि राज्य में इस समय चारधाम यात्रा की तैयारी के साथ ही जंगल की आग को रोकना महत्वपूर्ण विषय है।

आग की रोकथाम के लिए वन विभाग के अलावा अन्य विभाग भी अलर्ट मोड पर रहें। शुक्रवार सुबह करीब नौ बजे से ही नैनीताल जिले के गेठिया क्षेत्र के जंगलों की आग पाइंस तक पहुंच गई। आग से आइटीआइ का खंडहर में तब्दील भवन जलकर राख हो गया। हालात बेकाबू हुए तो आर्मी कैंट के जवानों को मोर्चा संभालना पड़ा। जवानों ने पाइंस क्षेत्र में आग को बुझा लिया और आसपास के क्षेत्र में नियंत्रण का प्रयास जारी है। लडि़याकांटा क्षेत्र में वायु सेना स्टेशन है। वायु सेना के जवान भी क्षेत्र में आग बुझाने में जुटे रहे। साथ ही स्थिति की गंभीरता को देखते हुए हेलीकाप्टर भी उतार दिया गया है।

कुमाऊं आयुक्त दीपक रावत ने बताया कि वायु सेना के इलाहाबाद कमांड के अधिकारियों से उनकी वार्ता हुई। इसके बाद उन्होंने मुख्य सचिव राधा रतूड़ी व उड्डयन सचिव सचिन कुर्वे से संपर्क किया। जिलाधिकारी वंदना ने पालिका के अधिशासी अधिकारी राहुल आनंद को हेलीकाप्टर को झीलों से पानी की अनुमति से संबंधित औपचारिकताएं पूरी करने के निर्देश दिए। मल्लीताल बोट स्टैंड से पानी भरने की सूचना पर झील में नौकायन भी बंद करवा दिया गया। यद्यपि हेलीकाप्टर यहां झील के ऊपर मंडराने के बाद भीमताल की ओर चला गया। भीमताल व नौकुचियाताल झील के ऊपर भी हेलीकाप्टर ने ट्रायल किया।

 

Related Posts