उत्तराखंड: महिला ने बच्चे को खेत में दिया जन्म, नवजात की मौत, हेलिकॉप्टर का इंतजार करता रहा परिवार

  • दो घंटे बाद हेलिकॉप्टर मेडिकल टीम के साथ पहुंचा।

  • हेलिकॉप्टर समय पर पहुंच जाता तो नवजात की जान बच जाती।

पिथौरागढ़: राज्य में स्वास्थ्य सेवाओं को बुरा हाल है। आए दिन इसकी तस्वीरें सामने भी आती रहती हैं। बावजूद, सरकार हर बार दावा करती है कि उनकी सरकार एयर एंबुलेंस (हेलिकॉप्टर) के जरिए लोगों को बचाने का काम कर रही है। स्वास्थ्य विभाग के इस दावे की पोल नवजात की मौत ने खोल दी। परिवार दो घंटे तक इंतजार करता रहा। हेलीकॉप्टर तब पहुंचा, जब खेत में जन्मा बच्चा आंखें खोलने से पहले ही दुनिया छोड़ चुका था।

यह मामला मुनस्यारी की ग्राम पंचायत पातों का है। यहां एक महिला ने खेत में ही बच्चे को जन्म दे दिया। प्रसव के करीब दो घंटे बाद हेलिकॉप्टर मेडिकल टीम के साथ पहुंचा। जांच के बाद टीम ने नवजात को मृत घोषित कर दिया। इसके बाद हेलिकॉप्टर महिला को लेकर पिथौरागढ़ अस्पताल पहुंचा, जहां महिला का इलाज चल रहा है।

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मीडिया रिपोर्ट के अनुसार मुनस्यारी ब्लॉक के पातों गांव निवासी लक्ष्मी देवी (25) पत्नी श्याम सिंह दरियाल को शनिवार को प्रसव पीड़ा हुई। इस पर लोगों ने विधायक को फोन पर मामले की जानकारी दी। विधायक हरीश धामी ने प्रशासन को फोन किया जिसके बाद हेलिकॉप्टर को पातों गांव भेजा गया। इधर महिला की पीड़ा बढ़ने लगी और उसने खेत में बच्चे को जन्म दे दिया।

आशा कार्यकर्ता खीला देवी ने बताया कि गर्भ में बच्चा उल्टा फंस गया था जिसे मुश्किल से निकाला गया। करीब दो घंटे बाद हेलिकॉप्टर मेडिकल टीम के साथ मौके पर पहुंचा। जांच के बाद टीम ने नवजात को मृत करार दे दिया। इसके बाद हेली से महिला को पिथौरागढ़ अस्पताल पहुंचाया गया। महिला की हालत में अब सुधार है।

जिला पंचायत सदस्य जगत मर्ताेलिया का कहना है कि अगर हेलिकॉप्टर समय पर पहुंच जाता तो नवजात की जान बच जाती। इधर, एसडीएम धारचूला नंदन कुमार का कहना है कि हेलिकॉप्टर के पायलट को वेदर क्लीयरेंस मिलने में थोड़ा समय लगा। हालांकि हेली समय से पहुंच गया था। बच्चा मृत ही पैदा हुआ था। वहीं परिजनों और जिला पंचायत सदस्य के मुताबिक हेलिकॉप्टर करीब दो घंटे देरी से पहुंचा।

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