शेर सिंह राणा, अफगानिस्तान से वापस लाई थीं पृथ्वी राज चौहान की अस्थियां, बड़े पर्दें पर दिखेगी कहानी

शेर सिंह राणा का नाम आपने सुना है? सुना भी होगा तो शायद अब याद नहीं होगा। शेर सिंह राणा पर अब फिल्म बनने जा रही है। शेर सिंह राणा को समझने के लिए पहले फूलन देवी के जीवन की कुछ घटनाओं को जानना जरूरी है। उत्तर प्रदेश में डकैतों के गिरोह की सरगना रही फूलन देवी ने 1981 में 14 फरवरी के दिन बेहमई गांव में ठाकुर परिवार के 22 लोगों को लाइन में खड़ा करके गोलियों से उड़ा दिया था। इसके चलते उत्तर प्रदेश के उस समय के मुख्यमंत्री विश्वनाथ प्रताप सिंह को इस्तीफा देना पड़ा। फूलन देवी ने बाद में इंदिरा गांधी की कोशिशों से मध्य प्रदेश में समर्पण किया।

उसके बाद वो राजनीति में आई। समाजवादी पार्टी की सांसद बनीं और बेहमई कांड के करीब 20 साल बाद 25 जुलाई 2001 को उनकी सरेआम दिन दहाड़े हत्या कर दी गई। इस हत्याकांड का मुख्य आरोपी है शेर सिंह राणा, जिसने पुलिस के सामने आत्मसमर्पण करते समय एलान किया कि ये हत्या उसने ठाकुर स्वाभिमान की रक्षा करने के लिए की। एक्शन हीरो विद्युत जामवाल इसी शेर सिंह राणा पर पिछले साल घोषित हुई बायोपिक का मुख्य किरदार करने जा रहे हैं।

अभी पिछले साल ही मार्च में शेर सिंह राणा कानपुर देहात के बेहमई गांव में था। उसको गांव आने का निमंत्रण मिला अखिल भारतीय क्षत्रिय महासभा के राष्ट्रीय संगठन मंत्री विनोद प्रताप सिंह बाली का। शेर सिंह राणा के बेहमई आने पर वहां हजारों की भीड़ इकट्ठा हुई। शेर सिंह राणा को देश के अलग अलग राज्यों में बने ठाकुरों के तमाम दूसरे संगठनों का भी समर्थन हासिल रहा है। 25 जुलाई 2001 को दिल्ली स्थित सरकारी आवास पर सासंद फूलन देवी की गोलियो से छलनी कर हत्या करने के दो दिन बाद फूलन देवी की हत्या के आरोपी शेर सिंह राणा ने हत्या की बात स्वीकार कर देहरादून पुलिस के सामने आत्म समर्पण कर दिया था।

फिल्म ‘शेर सिंह राणा’ की कहानी वहां से शुरू होती है जब वह साल 2004 में तिहाड़ जेल से फरार हो गया। फरार होने के बाद शेर सिंह राणा अफगानिस्तान गया। और, वहां जाने से पहले उसने एलान किया कि वह राजपूत सम्राट पृथ्वी राज चौहान की अस्थियां लेकर ही वहां से लौटेगा। उसने ऐसा किया भी। फिर 17 मई 2006 को शेर सिंह राणा को कोलकाता के एक गेस्ट हाउस से पुलिस ने गिरफ्तार कर लिया। 2014 में फूलन देवी की हत्या के मामले में शेर सिंह को आजीवन कारावास की सजा सुनाई गई और अदालत ने उसे अंतरिम जमानत भी दी। 2012 में उसने यूपी के जेवर विधानसभा क्षेत्र से राणा ने विधानसभा का चुनाव भी लडा।

बीते साल अक्तूबर में निर्माता विनोद भानुशाली और निर्देशक श्री नारायण सिंह की जोड़ी ने चर्चित शेर सिंह राणा के जीवन पर बायोपिक की घोषणा की थी। ये फिल्म कंधार से चौहान वंश के 11वीं शताब्दी के शासक पृथ्वीराज चौहान की निशानियों को वापस लाने की मुहिम पर केंद्रित है। निर्देशक श्री नारायण सिंह के मुताबिक, “जब मैंने शेर सिंह राणा के बारे में पढ़ा तो मैं उससे मिलने और इस जीवन यात्रा के अनुभवों को जानने के लिए बहुत उत्सुक हो गया। इस तथ्य को नजरअंदाज नहीं किया जा सकता कि किस तरह से शेर सिंह ने तालिबान को चुनौती देते हुए अफगानिस्तान से महान शासक पृथ्वीराज चौहान के अवशेषों को वापस लाने का साहसिक कार्य किया।”

इस फिल्म के निर्माता हैं, भानुशाली स्टूडियोज के संस्थापक विनोद भानुशाली। वह कहते हैं, “शेर सिंह राणा का जीवन कौतुक जगाता है। इस शख्स की इच्छाशक्ति और साथ ही अकेले ही एक ऐसे काम को अंजाम देना जो राजपूतों के लिए गर्व की बात रही, बतौर निर्माता मेरे लिए किसी फिल्म की कहानी से कम नहीं है। ‘टॉयलेट एक प्रेम कथा’ के निर्देशक रहे श्री नारायण सिंह ने शेर सिंह राणा के जीवन की बारीकियों को समझा है, मुझे विश्वास है कि वह इस कहानी के साथ पूरी तरह न्याय करने में सक्षम हैं।”

फिल्म शेर सिंह राणा में लीड रोल करने को लेकर अभिनेता विद्युत जामवाल भी खासे उत्साहित दिखे। वह कहते हैं, फिल्म ‘शेर सिंह राणा’ मेरी पहली बायोपिक है। मुझे लगता है कि नियति ने सारे पहलुओं को जोड़ा और शेर सिंह राणा की भूमिका मुझ तक पहुंचाई। मैं विनोद भानुशाली और नारायण सिंह के साथ काम करने के लिए बेहद उत्साहित हूं।

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