बदरीनाथ चढ़ावा हेराफेरी प्रकरण में प्रमोद नौटियाल को हाईकोर्ट से जमानत

by intelliberindia
  • परिजनों ने फैसले को बताया न्याय की जीत।
  • बरामदगी और जांच प्रक्रिया पर पहले भी उठाए थे सवाल।

नैनीताल/देहरादून। श्री बदरीनाथ धाम में श्रद्धालुओं के चढ़ावे से जुड़े कथित हेराफेरी प्रकरण में आरोपी बदरी-केदार मंदिर समिति (बीकेटीसी) के वैयक्तिक सहायक प्रमोद नौटियाल को उत्तराखंड हाईकोर्ट से बड़ी राहत मिली है। हाईकोर्ट ने उनकी जमानत याचिका स्वीकार करते हुए निर्धारित शर्तों के साथ रिहा करने के आदेश दिए हैं। न्यायालय के इस फैसले के बाद नौटियाल के परिजनों ने इसे न्याय की जीत बताया है।

न्यायमूर्ति आलोक मेहरा की पीठ ने मामले की सुनवाई करते हुए प्रमोद नौटियाल को व्यक्तिगत बंधपत्र और समान राशि के दो विश्वसनीय जमानतियों के आधार पर जमानत देने के आदेश दिए। हालांकि अदालत ने जमानत के साथ कई शर्तें भी निर्धारित की हैं।

हाईकोर्ट ने स्पष्ट किया है कि आरोपी मामले से जुड़े किसी व्यक्ति को धमकाने, प्रभावित करने या दबाव बनाने का प्रयास नहीं करेंगे। साथ ही वे साक्ष्यों के साथ किसी प्रकार की छेड़छाड़ नहीं करेंगे और जांच और न्यायिक प्रक्रिया में पूरा सहयोग करेंगे। अदालत की अनुमति के बिना देश छोड़ने पर भी रोक रहेगी। न्यायालय ने यह भी कहा है कि जमानत की शर्तों का उल्लंघन होने की स्थिति में अभियोजन पक्ष जमानत निरस्त कराने के लिए आवेदन कर सकता है।

मां ने कहा—न्यायपालिका पर था पूरा भरोसा

प्रमोद नौटियाल की जमानत मंजूर होने के बाद उनके परिवार में खुशी का माहौल है। उनकी माता हेमलता नौटियाल और अन्य पारिवारिक सदस्यों ने हाईकोर्ट के फैसले को न्याय की दिशा में महत्वपूर्ण कदम बताया।

परिजनों का कहना है कि उन्हें शुरू से ही न्यायपालिका पर पूरा भरोसा था और उन्हें विश्वास है कि आगे की कानूनी प्रक्रिया में भी सभी तथ्य सामने आएंगे। आवश्यक कानूनी औपचारिकताएं पूरी होने के बाद शनिवार को प्रमोद नौटियाल के जेल से रिहा होने की संभावना जताई जा रही है।

कथित बरामदगी को लेकर परिवार ने उठाए थे सवाल

इस मामले में प्रमोद नौटियाल के परिजनों ने जांच और कथित बरामदगी की प्रक्रिया को लेकर पहले भी सवाल उठाए थे। परिवार का आरोप रहा है कि बदरीनाथ स्थित बीकेटीसी के नीलकंठ विश्राम गृह के एक कक्ष से फर्जी तरीके से बरामदगी दिखाई गई।

परिजनों के अनुसार, जिस कक्ष से कथित बरामदगी दिखाई गई, उसे प्रमोद नौटियाल पहले ही खाली कर उसकी चाबी प्रबंधन को सौंप चुके थे। परिवार ने इस संबंध में सूचना का अधिकार अधिनियम के तहत बीकेटीसी से जानकारी भी मांगी थी और प्राप्त जवाबों को लेकर सवाल उठाए थे।

प्रमोद नौटियाल की पत्नी मीतू नौटियाल ने मामले की उच्चस्तरीय जांच समिति के समक्ष भी अपना पक्ष रखा था। समिति की अध्यक्षता गढ़वाल आयुक्त आनंद स्वरूप कर रहे थे। परिवार की ओर से जांच समिति के सामने विभिन्न तथ्यों को रखते हुए निष्पक्ष जांच और न्याय की मांग की गई थी।

प्रोटोकॉल अधिकारी और चढ़ावा गिनती की जिम्मेदारी को लेकर भी उठा था विवाद

मामले ने उस समय राजनीतिक रंग भी ले लिया था, जब विपक्षी दलों ने बीकेटीसी और प्रदेश सरकार से कई सवाल किए। कांग्रेस नेताओं ने यह मुद्दा उठाया था कि बीकेटीसी अध्यक्ष के वैयक्तिक सहायक होने के बावजूद प्रमोद नौटियाल को बदरीनाथ में प्रोटोकॉल अधिकारी की जिम्मेदारी किस आधार पर दी गई और उन्हें चढ़ावे की गिनती से जुड़े कार्यों में क्यों लगाया गया।

कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष गणेश गोदियाल ने इस मुद्दे पर सवाल उठाए थे। वहीं बीकेटीसी अध्यक्ष हेमंत द्विवेदी ने भी इन आरोपों को लेकर कांग्रेस नेतृत्व को बहस की चुनौती दी थी। इस मुद्दे पर कई दिनों तक राजनीतिक बयानबाजी और प्रेस कांफ्रेंसों का दौर चला।

श्रद्धालुओं के चढ़ावे से जुड़ा है मामला

गौरतलब है कि बदरीनाथ धाम में श्रद्धालुओं की ओर से चढ़ावे के रूप में दी जाने वाली नकदी और सोने-चांदी के सिक्कों से जुड़े कथित हेराफेरी प्रकरण ने प्रदेशभर में व्यापक चर्चा बटोरी थी। जांच और कानूनी कार्रवाई के बाद प्रमोद नौटियाल को मामले में आरोपी बनाया गया था।

अब हाईकोर्ट से उन्हें जमानत मिलने के बाद मामले ने नया मोड़ ले लिया है। हालांकि जमानत मिलने का अर्थ मामले में आरोपों का अंतिम निस्तारण नहीं है और प्रकरण में आगे की जांच तथा न्यायिक कार्रवाई जारी रहेगी।

इस मामले में सह-आरोपी बताए जा रहे पूर्व मंदिर अधिकारी राजेंद्र चौहान की जमानत को लेकर भी चर्चाएं तेज हो गई हैं। प्रमोद नौटियाल को हाईकोर्ट से राहत मिलने के बाद राजेंद्र चौहान की जमानत याचिका को लेकर भी अटकलें लगाई जा रही हैं। हालांकि उनकी जमानत पर अंतिम फैसला न्यायालय द्वारा उपलब्ध कानूनी तथ्यों और मामले की सुनवाई के आधार पर ही किया जाएगा।

फिलहाल प्रमोद नौटियाल को हाईकोर्ट से जमानत मिलने के बाद बदरीनाथ चढ़ावा हेराफेरी प्रकरण एक बार फिर चर्चा के केंद्र में आ गया है। मामले से जुड़े आरोपों, जांच प्रक्रिया और कथित बरामदगी को लेकर पहले से उठ रहे सवालों के बीच अब सभी की निगाहें आगे की न्यायिक कार्रवाई और जांच के निष्कर्षों पर टिकी हैं।

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