उत्तराखंड: UKSSSC से एस. राजू और बडोनी को क्यों नहीं हटा रही सरकार?

देहरादून: उत्तराखंड अधीनस्त चयन सेवा आयोग (uksssc) में भर्तियों में गड़बड़ी आम बात है। हाल ही में वीडियो और वीपीडीओ भर्ती में गड़बड़ी का खुलासा हो गया है। बावजूद, सरकार ने अब तक आयोग के अधिकारियों पर कोई कार्रवाई नहीं की है। उत्तराखंड विकास पार्टी के अध्यक्ष मुजीब नैथानी ने कहा कि अधीनस्थ सेवा चयन आयोग के अध्यक्ष एस राजू पूर्व से ही विवादित अधिकारी हैं, जिनके खिलाफ माननीय उच्चतम न्यायालय ने विशेष टिप्पणियां भी की हुई है।

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उसके बावजूद भाजपा सरकार का एस राजू के प्रति प्रेम दिखाता है कि भाजपा सरकार का अपरोक्ष रूप से अधीनस्थ सेवा चयन आयोग (uksssc) के द्वारा की जा रही भर्तियों में हो रहे घोटालों में हाथ है। उन्होंने कहा कि इतने सबूतों के बावजूद पुलिस केवल जांच के नाम पर कुछ लोगों को पकड़ के घोटालों को दबाने की कोशिश कर रही है, जबकि इसके असली गुनाहगारों तक पुलिस हाथ नहीं डाल सकती है। मुजीब नैथानी ने कहा कि यह कमाल की बात है कि अधीनस्थ सेवा चयन आयोग को भर्ती परीक्षा कराने के लिए ऐसी निजी कंपनी की सहायता लेनी पड़ती है, जो दो दो भाजपा शासित राज्यों में विवादित रही है।

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अधीनस्थ सेवा चयन आयोग (uksssc) अस्सी हजार अभ्यर्थियों के लिए आठ पालियों में परीक्षा करवाता है। उसमें भी गड़बड़ हो जाती है और इसी राज्य के लोक सेवा आयोग के द्वारा एक लाख साठ हजार अभ्यर्थियों का एक ही दिन में एग्जाम सफलता पूर्वक सम्पन्न हो जाता है, यह बताता है कि अधीनस्थ सेवा चयन आयोग के शीर्ष अधिकारी इन घोटालों में परोक्ष रूप से शामिल हैं, जो भाजपा सरकार को दिखाई नहीं दे रहा है।

भर्ती परीक्षाओं में हुई त्रुटियों को उत्तराखण्ड लोक सेवा आयोग ने तुरंत सुधार दिया, मगर यहां आयोग त्रुटियों को मानने के लिये भी जल्दी से तैयार नहीं होता है। ऐसी गलतियां और गलतियों के बावजूद अधिकारियों के खिलाफ कुछ न होना, बिना किसी शासकीय शह के मुमकिन नहीं है। मुजीब नैथानी ने प्रदेश हित में उत्तराखण्ड अधीनस्थ सेवा चयन आयोग के अध्यक्ष और सचिव को तुरंत प्रभाव से हटाने की मांग की।

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