उत्तराखंड: परिवहन मंत्री ने की समीक्षा, दिए ये बड़े निर्देश

देहरादून: कैबिनेट मंत्री चन्दन राम दास की अध्यक्षता में शपरिवहन आयुक्त कार्यालय, देहरादून में विभागीय समीक्षा बैठक सम्पन्न हुई। बैठक में परिवहन मंत्री द्वारा राजस्व, सड़क सुरक्षा, डिजीटाईजेशन, निर्माण कार्यों एवं प्रवर्तन कार्यों की समीक्षा करते हुए विभागीय अधिकारियों को निम्नवत् निर्देश दिये गये।

1. वर्तमान में विभाग द्वारा वाहन स्वामियों से भिन्न-भिन्न नामों से (ग्रीन उपकर, प्रवेश उपकर आदि) करो की वसूली की जा रही है। इससे वाहन स्वामियों में भ्रम की स्थिति बनी रहती है। अतः विभाग द्वारा कर ढांचे को तर्कसंगत बनाते हुए उसका सरलीकरण किया जाये।

2. परिवहन मंत्री द्वारा अधिकारियों से अपेक्षा की गयी कि विभाग का उद्देश्य केवल करों की वसूली ही नहीं होना चाहिए, अपितु ऐसे प्रयास करने चाहिए कि जनता को परिवहन विभाग की पारदर्शी और त्वरित सेवा सुगमता से प्राप्त हो सके।

3. मार्ग पर भ्रमण के दौरान देखा गया है कि विभाग द्वारा यात्रा मार्गों पर जो चेकपोस्टें स्थापित की गयी है। यहां नेटवर्क कनेक्टिविटी न होने के कारण वाहनों के प्रपत्रों की ऑनलाईन जांच नहीं हो पा रही है, जिससे वाहन स्थानियों को अनावश्यक विलम्ब हो रहा है और चेकपोस्ट पर लाईन भी लग रही है। मंत्री ने निर्देश दिये कि चैकपोस्टों को ऐसे स्थान पर स्थापित किया जाये जहां कनेक्टिविटी उपलब्ध हो और वाहन स्वामियों को कम से कम परेशानी हो।

4. उन्होंने यह भी निर्देश दिये कि विभाग द्वारा अधिकतर कार्य ऑनलाईन कर दिये गये हैं, परन्तु कार्यों का ऑटोमेशन करते समय यह भी ध्यान में रखा जाना चाहिए कि उक्त व्यवस्था का लाभ अपेक्षाकृत कम पढ़े-लिखे चालक-परिचालक को मिले और उसे अनाधिकृत व्यक्तियों के पास न जाना पड़े।

5. बकाया राजस्व के मामलों की समीक्षा करते हुए मंत्री द्वारा निर्देश दिये गये कि विभाग द्वारा लम्बे समय तक वाहन स्वामियों को मांग पत्र/वसूली पत्र निर्गत नहीं किये जाते हैं, जिसके कारण वाहन स्वामी के प्रति देय धनराशि बढ़ती रहती है। जब विभाग द्वारा वाहन स्वामियों को बकाया जमा करने का नोटिस दिया जाता है, तब वाहन स्वामी बकाया जमा करने में सक्षम नहीं हो पाता है। अधिकारियों को निर्देश दिये कि वे वाहन के बकाया में आने के एक वर्ष के अन्तर्गत नोटिस जारी करते हुए वसूली की कार्यवाही सुनिश्चित की जाए। साथ ही यह भी निर्देश दिये गये कि लम्बी अवधि से बकाया के मामलों के निस्तारण के सम्बन्ध में एक कार्ययोजना विकसित की जाये।

 

6. राज्य में सड़क दुर्घटनाओं के मामलों की बढ़ती संख्या पर चिन्ता व्यक्त करते हुए,  मंत्री द्वारा कहा गया कि कोई भी दुर्घटना घटित होना अत्यन्त दुर्भाग्यपूर्ण है, जिसमें प्रभावित परिवार के साथ-साथ प्रदेश को भी क्षति पहुंचती है। मंत्री जी द्वारा भविष्य में पर्वतीय क्षेत्रों में दुर्घटनाओं की रोकथाम हेतु विशिष्ट कार्ययोजना बनाये जाने पर बल दिया। मंत्री द्वारा सभी ब्लैक स्पॉट/ संवेदनशील स्थलों पर कैश बैरियर लगाये जाने, ओवरस्पीड/नशे की हालत में वाहन चलाने वाले चालकों के विरूद्ध कठोर प्रवर्तन की कार्यवाही करने के निर्देश दिये गये। साथ ही निर्देश दिये गये कि समय-समय पर मोबाईल टीम द्वारा चालक की दशा की भी जाँच की जाए कि कहीं चालक अस्वस्थ अथवा थका हुआ तो नहीं है। मंत्री द्वारा चालकों को समय-समय पर प्रशिक्षण प्रदान करने के भी निर्देश दिये गये।

7. कैबिनेट मंत्री जी द्वारा इस बात पर भी बल दिया गया कि किसी भी प्रकार की घटना होने पर सबसे पहले स्थानीय व्यक्ति ही मदद के लिए पहुंचता है, पुलिस, परिवहन अथवा अन्य विभाग के अधिकारी बाद में पहुंचते हैं। अतः विभाग द्वारा फर्स्ट रेस्पोन्डर प्रशिक्षण प्रदान करना चाहिए, ताकि घायलों को तत्काल फर्स्ट एड उपलब्ध कराते हुए, उनकी जान बचायी जा सके।

8. कोविड-19 से प्रभावित चालको/परिचालको/क्लीनर्स को मुख्यमंत्री की घोषणा के अनुरूप धनराशि की सभी किश्त प्राथमिकता के आधार पर सम्बन्धित लाभार्थियों के खाते में स्थानान्तरित की जाये।

9. मंत्री द्वारा निगम की आय बढ़ाने और यात्रियों को निगम की बेहतर सेवायें उपलब्ध कराने के निर्देश दिये गये।

10. यह भी निर्देश दिये गये कि निगम स्तर पर वाहन चालकों एवं परिचालकों के लिए विश्राम स्थल की उचित व्यवस्था की जाये।

11- मंत्री द्वारा उत्तराखण्ड परिवहन निगम की सम्पत्तियों/भूमि आदि को अतिक्रमण से बचाने हेतु समस्त उपाय करने के निर्देश अधिकारियों को दिये गये।

12- परिवहन मंत्री ने निगम के कर्मचारियों को समय से वेतन का भुगतान कर निगम की आय बढ़ाने हेतु बस अड्डो पर व्यवसायिक गतिविधियाँ विकसित करने पर भी विचार कर लिया जाए।

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