ज्योतिर्मठ/बद्रीनाथ। सीमांत जनपद के ऊंचाई वाले क्षेत्रों सहित बद्रीनाथ धाम, हेमकुंड साहिब और फूलों की घाटी में शनिवार को हुए भारी हिमपात ने जनजीवन और यात्रा व्यवस्थाओं की रफ्तार थाम दी है। बद्रीनाथ धाम में सुबह से रुक-रुक कर हो रही बर्फबारी के कारण नर-नारायण और नीलकंठ पर्वत चांदी की तरह सफेद चादर से ढक गए हैं। कड़ाके की ठंड के बीच धाम में व्यवस्थाओं को अंतिम रूप दे रहे अधिकारी और कर्मचारियों को भारी दुश्वारियों का सामना करना पड़ रहा है। हालांकि, नगर पंचायत द्वारा लगातार बर्फ हटाने का काम किया जा रहा है, लेकिन निरंतर हो रहे हिमपात से रास्ते फिर बंद हो रहे हैं। बद्रीनाथ-केदारनाथ मंदिर समिति (BKTC) की टीम भी धाम पहुंच चुकी है, लेकिन बदलते मौसम ने तैयारियों के सामने कड़ी चुनौती पेश की है।
धाम में मौजूद स्थानीय निवासी नीतीश चौहान और अंशुमान भंडारी ने बताया कि कपाट खुलने से पहले होटलों और धर्मशालाओं के मरम्मत कार्य के लिए प्रशासन की अनुमति से लोग पहुंच तो रहे हैं, लेकिन हाड़ कंपाने वाली ठंड और बर्फबारी से काम करना मुश्किल हो गया है। वहीं, बीकेटीसी के पूर्व उपाध्यक्ष किशोर पंवार ने चिंता जताई कि खराब मौसम के कारण धाम में चल रहे मास्टर प्लान के तहत निर्माण कार्य भी बुरी तरह प्रभावित हो रहे हैं।
मामले पर ज्योतिर्मठ के उप जिलाधिकारी चंद्रशेखर वशिष्ठ ने बताया कि सुरक्षा के दृष्टिगत प्रशासन ने फिलहाल रविवार तक किसी भी नए व्यक्ति को बद्रीनाथ धाम जाने की अनुमति नहीं दी है। मौसम सामान्य होने के बाद ही आवाजाही सुचारू की जाएगी। उन्होंने स्पष्ट किया कि प्रशासन लगातार स्थिति पर नजर बनाए हुए है और धाम में तैनात टीम कपाट खोलने की तैयारियों में जुटी है। बिजली, पानी, संचार और क्षतिग्रस्त पैदल रास्तों का काम लगभग पूरा कर लिया गया है। एसडीएम ने भरोसा दिलाया कि मौसम की चुनौतियों के बावजूद 15 अप्रैल तक सभी व्यवस्थाएं चाक-चौबंद कर ली जाएंगी ताकि तीर्थयात्रियों को किसी प्रकार की असुविधा न हो।

