- डीएसआईआर की सचिव एवं सीएसआईआर की महानिदेशक डॉ. एन. कलैसेल्वी भी उपस्थित रहीं
- सीएसआईआर–सीबीआरआई के मुख्य वैज्ञानिक डॉ. संजीव कुमार सिंह ने “जलवायु परिवर्तन से निपटने के लिए ए.आई. प्रौद्योगिकियां: अवसर और चुनौतियां” विषय पर व्याख्यान दिया
नई दिल्ली : सीएसआईआर–केंद्रीय भवन अनुसंधान संस्थान, रुड़की ने 28–30 जनवरी 2026 को पृथ्वी भवन, पृथ्वी विज्ञान मंत्रालय, भारत सरकार, नई दिल्ली में प्रौद्योगिकी एवं नवाचार सम्मेलन 2.0, जो भारत सरकार के विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी मंत्रालय के वैज्ञानिक एवं औद्योगिक अनुसंधान विभाग (डीएसआईआर) तथा संयुक्त राष्ट्र आर्थिक एवं सामाजिक आयोग फॉर एशिया एंड द पैसिफिक (यूएन-ईएससीएपी) के एशियाई एवं प्रशांत प्रौद्योगिकी हस्तांतरण केंद्र (एपीसीटीटी) द्वारा संयुक्त रूप से आयोजित किया जा रहा है, उसमें भाग लिया। सम्मेलन के दौरान आयोजित प्रदर्शनी का उद्घाटन मुख्य अतिथि, पृथ्वी विज्ञान राज्य मंत्री डॉ. जितेंद्र सिंह ने किया।
इस अवसर पर डीएसआईआर की सचिव एवं सीएसआईआर की महानिदेशक डॉ. एन. कलैसेल्वी भी उपस्थित रहीं। उद्घाटन के पश्चात डॉ. जितेंद्र सिंह एवं डॉ. एन. कलैसेल्वी दोनों ने सीबीआरआई के प्रदर्शनी स्टॉल का दौरा किया, जहाँ सीएसआईआर–सीबीआरआई द्वारा भवन विज्ञान एवं निर्माण के क्षेत्र में विकसित नवीन, टिकाऊ और प्रौद्योगिकी-आधारित समाधानों को प्रस्तुत किया गया। उन्होंने स्टॉल पर प्रदर्शित पीएमएवाई-जी के अंतर्गत विकसित 3डी-प्रिंटेड ग्रामीण मकान और ज़िग-ज़ैग ईंट भट्ठा तकनीक जैसे मॉडलों का अवलोकन किया और संस्थान के वैज्ञानिकों से बातचीत की। इस दौरान उन्होंने जलवायु-प्रतिरोधी और टिकाऊ अवसंरचना से जुड़ी सीबीआरआई की तकनीकों और शोध कार्यों में रुचि दिखाई।
उद्घाटन सत्र के दौरान डॉ. एन. कलैसेल्वी ने उपस्थित सभी लोगों को संबोधित किया। उन्होंने अपने संबोधन में जलवायु परिवर्तन से जुड़ी समस्याओं से निपटने और आपदाओं के प्रति मजबूती बढ़ाने में उन्नत तकनीकों और कृत्रिम बुद्धिमत्ता की भूमिका पर बात की। उन्होंने इस दिशा में सीएसआईआर प्रयोगशालाओं के योगदान को अहम बताया। साथ ही, उन्होंने अनुसंधान कार्यों को उपयोगी और व्यवहारिक समाधानों में बदलने की आवश्यकता पर जोर दिया, ताकि सतत विकास को बढ़ावा मिल सके।
तकनीकी कार्यक्रम के अंतर्गत सीएसआईआर–सीबीआरआई के मुख्य वैज्ञानिक डॉ. संजीव कुमार सिंह ने “जलवायु परिवर्तन से निपटने के लिए ए.आई. प्रौद्योगिकियां: अवसर और चुनौतियां” विषय पर व्याख्यान दिया। उन्होंने बताया कि जलवायु परिवर्तन के प्रभावों को ध्यान में रखते हुए भवनों और अवसंरचना की योजना बनाने, उनकी जांच करने और उनके प्रबंधन में कृत्रिम बुद्धिमत्ता का उपयोग कैसे किया जा सकता है। साथ ही, उन्होंने इस क्षेत्र में सीबीआरआई द्वारा किए जा रहे अनुसंधान कार्यों और उनके वास्तविक उपयोग के उदाहरण भी प्रस्तुत किए।
संस्थान की भागीदारी ने किफायती आवास, जलवायु-लचीले बुनियादी ढांचे, सतत ग्रामीण विकास और अत्याधुनिक निर्माण अनुसंधान को बढ़ावा देने के प्रति इसकी अटूट प्रतिबद्धता को उजागर किया, जिससे राष्ट्रीय विकास लक्ष्यों और वैश्विक तकनीकी प्रगति के साथ इसका तालमेल और मजबूत हुआ।


