देहरादून: उत्तराखंड परिवहन निगम घाटे में है। निगम को घाटे से बाहर निकालने के लिए तमाम प्रयास किए जा रहे हैं। लेकिन, आज तक सफलता नहीं मिल पाई। इसके लिए कोई और नहीं, बल्कि निगम के कर्मचारी ही जिम्मेदार हैं। कभी पूरी बस बेटिकट पकड़ी जाती है, तो कभी 250 किलोमीटर चलने के बाद बस केवल 20 रुपये की कमाई करती है। कुछ ऐसा ही मामला सामने आया है।

लेकिन, इस बार वाल्बो बस के कंडक्टर का शिकार कोई और नहीं। बल्कि परिवहन निगम के MD राहित मीणा हुए। MD बस में सवारी बनकर सवार हुए। वे दिल्ली से नान-स्टाप वाल्वो बस में यात्री बनकर सवार हुए और मुजफ्फरनगर तक का टिकट मांगा। कंडक्टर ने उनको टिकट तो मुजफ्फर नगर का दिया, लेकिन किराया देहरादून का लिया। एमडी रोहिम मीणा ने कंडक्टर को तत्काल बर्खास्त कर दिया। प्रवर्तन टीमों को सभी नान-स्टाप वाल्वो बसों की चेकिंग का आदेश दिए हैं।

मामला तीन जुलाई का है। परिवहन निगम के MD रोहित मीणा खुद बसों की जांच के लिए निकले थे। ISBT दिल्ली से शाम के वक्त संचालित वाल्वो (UK07-PA-0333) में एमडी साधारण यात्री की तरह सवार हुए। बस पर विशेष श्रेणी परिचालक अमन कुमार की तैनाती थी। प्रबंध निदेशक ने उससे मुजफ्फरनगर तक का टिकट मांगा।

परिचालक ने बताया कि बस नान-स्टाप है और किराया देहरादून तक का देना पड़ेगा। MD ने उसे दून तक के किराये के 809 रुपये दिए, लेकिन परिचालक ने टिकट मशीन से मुजफ्फरनगर तक का 391 रुपये का टिकट बनाकर उन्हें थमा दिया।

इस बीच MD रोहित मीणा मुजफ्फरनगर में उतर गए और अगले दिन मुख्यालय पहुंचकर अधिकारियों की बैठक बुलाई। नान-स्टाप बसों के नाम पर वाल्वो में चल रही धांधली पर नाराजगी जताते हुए उन्होंने हर वाल्वो बस की जांच के आदेश दिए। साथ ही परिचालक अमन कुमार को बर्खास्त कर दिया।

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