मुंबई। उत्तराखंड की समृद्ध लोक संस्कृति और पर्यावरण संरक्षण की परंपरा से जुड़े लोकपर्व हरेला के समापन अवसर पर मुंबई में गढ़वाल भ्रातृ मंडल की ओर से वृक्षारोपण कार्यक्रम आयोजित किया गया। दहिसर स्थित कोंकणी पाड़ा में आयोजित कार्यक्रम में विभिन्न प्रजातियों के पौधे रोपे गए। इस दौरान बड़ी संख्या में स्थानीय लोगों और महिलाओं ने पर्यावरण संरक्षण का संकल्प लिया।
कार्यक्रम में मुख्य अतिथि स्थानीय नगर सेवक एवं प्रभाग समिति के अध्यक्ष प्रकाश दरेकर ने पौधरोपण को पर्यावरण संरक्षण की दिशा में महत्वपूर्ण पहल बताया। उन्होंने कहा कि हरेला केवल एक लोकपर्व नहीं, बल्कि प्रकृति के प्रति उत्तराखंड की गहरी आस्था और पर्यावरण संरक्षण की सदियों पुरानी लोक परंपरा का प्रतीक है। इस परंपरा को नई पीढ़ी तक पहुंचाना और इसे जीवंत बनाए रखना जरूरी है।

कार्यक्रम के दौरान उपस्थित महिलाओं को पौधों की देखभाल और पर्यावरण संरक्षण का संकल्प दिलाया गया। मुख्य अतिथि की ओर से महिलाओं को तुलसी के पौधे तथा स्वतंत्रता दिवस के अवसर पर तिरंगा झंडा भेंट कर सम्मानित किया गया।
कार्यक्रम के आयोजक गढ़वाल भ्रातृ मंडल के अध्यक्ष रमण मोहन कुकरेती ने सभी अतिथियों का तुलसी के पौधे भेंट कर स्वागत किया। उन्होंने कहा कि उत्तराखंड की लोक परंपराओं में प्रकृति और पर्यावरण का विशेष महत्व रहा है। हरेला इसी भावना को आगे बढ़ाने वाला पर्व है और मुंबई जैसे महानगर में भी उत्तराखंड की इस परंपरा को निरंतर जीवित रखना संस्था का उद्देश्य है।

कार्यक्रम को सफल बनाने में आयुष कंडारी, माया जोशी, देविका नेगी, पुष्पा बिष्ट और शुकदेव शर्मा का विशेष योगदान रहा। इस अवसर पर आचार्य जयानंद सेमवाल, ललित बिष्ट, सुनील नौडियाल, कुंदन सिंह नेगी, कवि दत्त जोशी, भागवत सिंह मेहरा, नीरज नयाल सहित कई गणमान्य लोग मौजूद रहे।
कार्यक्रम के अंत में कार्यकारिणी सदस्य गोपाल नयाल ने आयोजन को सफल बनाने के लिए सभी अतिथियों, पदाधिकारियों और उपस्थित लोगों का आभार व्यक्त किया।

