तेहरान: पश्चिम एशिया में जारी तनाव के बीच अमेरिका और इज़राइल ने संयुक्त रूप से ईरान पर बड़े पैमाने पर हवाई हमले किए। इन हमलों में ईरान के कई शहरों और सैन्य ठिकानों को निशाना बनाया गया, जिसमें तेहरान में सर्वोच्च नेता अयातुल्ला अली खामेनेई का परिसर भी शामिल था। ईरानी राज्य मीडिया ने पुष्टि की है कि खामेनेई इन हमलों में मारे गए। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप और इज़राइली प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू ने भी इसकी पुष्टि की है।
ट्रंप ने ट्रुथ सोशल पर पोस्ट करते हुए कहा कि यह हमला ईरान की परमाणु और बैलिस्टिक मिसाइल क्षमताओं को नष्ट करने के साथ-साथ “रेजीम चेंज” का लक्ष्य रखता है। उन्होंने घोषणा की कि बमबारी “पूरे सप्ताह या आवश्यकता अनुसार” जारी रहेगी, ताकि मध्य पूर्व में शांति स्थापित हो सके। इज़राइल ने दावा किया कि खामेनेई उनके हवाई हमले में तेहरान स्थित उनके कंपाउंड में मारे गए।
ईरानी राज्य मीडिया के अनुसार, खामेनेई उनके कार्यालय में हमले के समय मौजूद थे। उनके परिवार के कई सदस्य—बेटी, पोता, दामाद और बहू—भी इन हमलों में मारे गए। रिपोर्ट्स में कहा गया है कि कुल 40 से अधिक ईरानी अधिकारी और नेता इन स्ट्राइक्स में मारे गए।
ईरान ने 40 दिनों का राष्ट्रीय शोक घोषित कर दिया है और एक सप्ताह की सार्वजनिक छुट्टियां घोषित की हैं। जवाब में ईरान ने तीव्र प्रतिक्रिया दी। ईरानी सेना और इस्लामिक रिवॉल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स (IRGC) ने इज़राइल पर मिसाइल और ड्रोन हमले किए, साथ ही क्षेत्र में अमेरिकी सैन्य ठिकानों को निशाना बनाया।
इनमें बहरीन (यूएस फिफ्थ फ्लीट बेस), कतर (अल-उदीद एयर बेस), संयुक्त अरब अमीरात (अल-धफ्रा), कुवैत (अली अल-सेलेम), जॉर्डन और सऊदी अरब शामिल हैं। ईरान ने वादा किया है कि यह “इस्लामी गणराज्य के इतिहास में सबसे उग्र हमला” होगा।
अभी तक अमेरिकी सैनिकों की मौत की कोई पुष्टि नहीं हुई है, लेकिन क्षेत्र में विस्फोटों की खबरें आ रही हैं। रूस ने अमेरिका-इज़राइल के हमलों की निंदा की है और इसे “संप्रभु राज्य पर आक्रामकता” बताया है। संयुक्त राष्ट्र और अंतरराष्ट्रीय समुदाय ने तनाव कम करने की अपील की है, जबकि मध्य पूर्व में युद्ध की आशंका बढ़ गई है।

