उत्तराखंड में मदरसा बोर्ड समाप्त

by intelliberindia

देहरादून। उत्तराखंड की धामी सरकार ने राज्य की शिक्षा व्यवस्था और अल्पसंख्यक कल्याण की दिशा में एक क्रांतिकारी कदम उठाते हुए ‘मदरासा बोर्ड’ को पूरी तरह समाप्त कर दिया है। शासन द्वारा जारी ताजा अधिसूचना के अनुसार, मदरसा बोर्ड की जगह अब ‘उत्तराखंड राज्य अल्पसंख्यक शिक्षा प्राधिकरण’ का गठन किया गया है। यह नया प्राधिकरण ही अब राज्य में अल्पसंख्यक शिक्षण संस्थानों की निगरानी और उनके लिए भविष्य की रूपरेखा तैयार करेगा। सरकार के इस बड़े फैसले को अल्पसंख्यकों की शिक्षा व्यवस्था को मुख्यधारा से जोड़ने और उसे आधुनिक बनाने की दिशा में एक निर्णायक मोड़ माना जा रहा है।

अध्यक्ष समेत 9 सदस्यों की नई टीम तैनात

नवगठित प्राधिकरण के संचालन के लिए शासन ने अध्यक्ष समेत नौ सदस्यों की नियुक्ति भी कर दी है। बीएसएम पीजी कॉलेज रुड़की के सेवानिवृत्त प्रोफेसर डॉ. सुरजीत सिंह गांधी को इस महत्वपूर्ण प्राधिकरण का प्रथम अध्यक्ष नियुक्त किया गया है। प्रोफेसर गांधी के पास लंबा शैक्षणिक अनुभव है, जो प्राधिकरण के उद्देश्यों को प्राप्त करने में सहायक होगा। इस टीम में दो पदेन सदस्य और एक पदेन सदस्य सचिव की भी नियुक्ति की गई है, जो प्रशासनिक और समन्वय कार्यों को सुचारू रूप से संचालित करेंगे।

प्राधिकरण ही तय करेगा नया पाठ्यक्रम (सिलेबस)

इस नए बदलाव की सबसे अहम कड़ी यह है कि अब उत्तराखंड राज्य अल्पसंख्यक शिक्षा प्राधिकरण ही मदरसों और अन्य अल्पसंख्यक शिक्षण संस्थानों के लिए नया पाठ्यक्रम (सिलेबस) तैयार करेगा। प्राधिकरण की नई टीम पर यह जिम्मेदारी होगी कि वे शिक्षा की गुणवत्ता में सुधार करें और छात्रों को आधुनिक शिक्षा के साथ-साथ रोजगारपरक कौशलों से जोड़ें। माना जा रहा है कि इस प्राधिकरण के गठन के बाद अब अल्पसंख्यक शिक्षा के ढांचे में पारदर्शिता आएगी और सरकारी मानकों के अनुरूप शिक्षा प्रदान करना अनिवार्य होगा।

अधिसूचना जारी, अब नए सिरे से होगी व्यवस्था

शासन द्वारा अधिसूचना जारी होने के साथ ही पुराने मदरसा बोर्ड का अस्तित्व समाप्त हो गया है। अब राज्य के सभी मदरसे और अल्पसंख्यक विद्यालय इसी नए प्राधिकरण के अधीन संचालित होंगे। सरकार का तर्क है कि इस बदलाव से अल्पसंख्यक युवाओं को बेहतर और गुणवत्तापूर्ण शिक्षा मिलेगी, जिससे वे प्रतिस्पर्धा के युग में स्वयं को साबित कर सकेंगे। आने वाले दिनों में यह प्राधिकरण पाठ्यक्रम में बड़े बदलावों और नए नियमों की घोषणा कर सकता है।

Related Posts