देहरादून : प्रयागराज माघ मेले में मौनी अमावस्या के दौरान गंगा स्नान को लेकर हुए विवाद के बाद ज्योतिर्मठ के शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती को उत्तराखंड से महत्वपूर्ण धार्मिक समर्थन मिला है। बदरीनाथ धाम के पुजारी समुदाय की प्रमुख संस्था श्री बदरीनाथ डिमरी धार्मिक केंद्रीय पंचायत ने उन्हें भगवान बदरी विशाल की प्राचीन गाडू घड़ा यात्रा में शामिल होने का औपचारिक निमंत्रण भेजा है।
पंचायत अध्यक्ष पंडित आशुतोष डिमरी ने बताया कि निमंत्रण पत्र में शंकराचार्य महाराज से ऋषिकेश से बदरीनाथ धाम तक तेल कलश (गाडू घड़ा) की यात्रा में भाग लेने का अनुरोध किया गया है। यह निमंत्रण उन्हें शंकराचार्य के रूप में ही संबोधित कर भेजा गया है, जो वर्तमान विवादों के बीच उनके पद की मान्यता का स्पष्ट संकेत माना जा रहा है।
प्रयागराज विवाद का संक्षिप्त पृष्ठभूमि मौनी अमावस्या (18 जनवरी 2026) को संगम स्नान के दौरान शंकराचार्य को पालकी से जाने से रोका गया, जिसके बाद उन्होंने धरना दिया और बिना स्नान किए काशी लौट आए। काशी पहुंचकर उन्होंने उत्तर प्रदेश सरकार को गौमाता को राज्य माता का दर्जा देने सहित अन्य मांगों के लिए 40 दिनों का अल्टीमेटम दिया था। इस बीच प्रयागराज प्रशासन ने उनके ‘शंकराचार्य’ पद पर भी नोटिस जारी किया था, जिसका उन्होंने जवाब दिया है।

गाडू घड़ा यात्रा की पौराणिक परंपरा बदरीनाथ धाम के कपाट खुलने से पहले यह सबसे महत्वपूर्ण अनुष्ठानों में से एक है। टिहरी गढ़वाल के नरेंद्र नगर राज दरबार में महारानी के नेतृत्व में सुहागिन महिलाएं पारंपरिक तरीके से (सिलबट्टे, कोल्हू और हाथों से) तिलों का तेल निकालती हैं। यह तेल भगवान बदरी विशाल के लेप, अखंड ज्योति और अन्य पूजा-अर्चना में उपयोग होता है। तैयार तेल को कलश में भरकर ऋषिकेश से बदरीनाथ तक धार्मिक यात्रा निकाली जाती है।
बदरीनाथ धाम के कपाट खुलने की तिथि इस वर्ष बदरीनाथ धाम के कपाट 23 अप्रैल 2026 को ब्रह्म मुहूर्त में सुबह 6:15 बजे खुलेंगे। गाडू घड़ा यात्रा 7 अप्रैल से शुरू होगी। तिथि की घोषणा बसंत पंचमी पर नरेंद्र नगर राज दरबार में राजपुरोहितों द्वारा पंचांग, ग्रह-नक्षत्र और शुभ मुहूर्त की गणना के आधार पर की गई थी।
धार्मिक महत्व और संभावित प्रभाव आदि शंकराचार्य द्वारा स्थापित चार पीठों में उत्तर दिशा की ज्योतिषपीठ बदरीनाथ धाम से जुड़ी है, जहां स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद विराजमान हैं। डिमरी पंचायत का यह निमंत्रण प्रयागराज विवाद के बीच उनके पद को धार्मिक स्तर पर मजबूती प्रदान करता है। धार्मिक जानकारों का मानना है कि यह उत्तराखंड से मिला संकेत राजनीतिक और सामाजिक चर्चाओं को नई दिशा दे सकता है।

