चमोली। 12 वर्षों के अंतराल के बाद चमोली जिले में आयोजित होने वाली मां नंदा की बड़ी जात के आयोजन की औपचारिक तिथि आगामी 23 जनवरी, बसंत पंचमी के अवसर पर घोषित की जाएगी। यह घोषणा मां नंदा के सिद्धपीठ कुरुड़ मंदिर में विधि-विधान के साथ दिनपट्टा (यात्रा का संकल्प) के रूप में की जाएगी।
इस अवसर पर नंदा मंदिर में विशेष पूजन-अर्चन का आयोजन होगा, जिसमें 14 सयाने, जनप्रतिनिधि, आचार्य गौड़ ब्राह्मण, मंदिर समिति के पदाधिकारी और बड़ी संख्या में श्रद्धालु उपस्थित रहेंगे।
कुरुड़ मंदिर समिति के अध्यक्ष सुखवीर रौतेला ने बताया कि परंपरानुसार नंदा की बड़ी जात का दिनपट्टा कुरुड़ में ही घोषित किया जाता है और यात्रा का शुभारंभ भी यहीं से होता है। उन्होंने कहा कि कुछ वर्षों से नंदा जात की ऐतिहासिक परंपराओं में बदलाव कर यात्रा को नौटी से प्रारंभ बताया जा रहा है, जो कि तथ्यात्मक और परंपरागत रूप से गलत है।
मंदिर समिति से जुड़े कर्नल हरेंद्र सिंह रावत (सेनि.) ने कहा कि शासन-प्रशासन द्वारा जारी सूचियों में नंदा जात के ऐतिहासिक पड़ावों का उल्लेख नहीं किया गया है, जिससे क्षेत्रवासियों और श्रद्धालुओं में आक्रोश है। उन्होंने स्पष्ट किया कि मां नंदा की बड़ी जात का प्रथम पड़ाव कुरुड़ है, न कि नौटी। वर्षों से कुछ लोगों द्वारा गलत परंपरा का निर्वहन किया जा रहा है।
नंदा राजजात’ शब्द पर आपत्ति
मंदिर समिति ने “नंदा राजजात” शब्द के प्रयोग पर भी आपत्ति जताई है। समिति अध्यक्ष सुखवीर रौतेला और मां नंदा देवी के पुजारी धनीराम गौड़ ने बताया कि परंपरा के अनुसार हर वर्ष मां नंदा की लोकजात और प्रत्येक 12 वर्षों में बड़ी जात आयोजित होती है। उन्होंने कहा कि वर्ष 1987 के बाद कुछ लोगों द्वारा इसे ‘राजजात’ कहना शुरू किया गया, जबकि शास्त्रों और परंपराओं में इसका कोई उल्लेख नहीं है। मां नंदा की बड़ी जात लगभग 280 किलोमीटर लंबी पैदल यात्रा है, जो आस्था, संस्कृति और लोक परंपराओं का जीवंत प्रतीक मानी जाती है।

