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- आपदा की घड़ी में प्रशासन बना सहारा, राहत कार्यों में दिखाई तत्परता
- जिलाधिकारी के नेतृत्व में प्रभावी राहत एवं बचाव कार्य जारी, लोगों को मिल रही तत्काल सहायता
- पशुपालन से लेकर जनजीवन तक, हर मोर्चे पर सक्रिय दिखा प्रशासन
- घायल पशुओं का उपचार, लापता लोगों की खोज और बिजली-पानी की व्यवस्था में दिखा बेहतर समन्वय
- ऊर्जा और खाद्य आपूर्ति विभागों ने तत्परता से बहाल की आवश्यक सेवाएं, ग्रामीणों को मिला भरोसा
रुद्रप्रयाग : जनपद रुद्रप्रयाग के बसुकेदार क्षेत्रांतर्गत ताल जामण, छेनागाड़ एवं स्यूर गांवों में गुरुवार रात्रि को हुई अतिवृष्टि ने जनजीवन को प्रभावित किया है ,अतिवृष्टि के कारण आए जलप्रलय और मलबे की चपेट में आकर पशु लापता हो गए हैं, जबकि कुछ लोगों के लापता होने की भी पुष्टि की गई है। स्थिति की गंभीरता को देखते हुए जिला प्रशासन द्वारा त्वरित संज्ञान लेते हुए राहत एवं बचाव कार्यों की कमान संभाल ली थी, थी ,जिला प्रसासन द्वारा आपदा राहत टीमो द्वारा शुक्रवार दोपहर से ही राहत बचाव के कार्य सुरु कर दिए गए थे ,आज शनिवार दूसरे दिन भी राहत बचाव कार्य किये जा रहे है।
जिलाधिकारी प्रतीक जैन ने आपदा के तुरंत बाद उच्च स्तरीय नोडल अधिकारियों की टीम को प्रभावित क्षेत्रों में राहत कार्यों हेतु तैनात कर दिया था। जिलाधिकारी ने स्पष्ट निर्देश दिए कि आपदा प्रभावित क्षेत्रों में राहत एवं पुनर्वास कार्यों को सर्वोच्च प्राथमिकता पर लिया जाए और प्रभावित परिवारों को हरसंभव सहायता उपलब्ध कराई जाए। प्रशासन की सक्रियता से राहत कार्यों में तीव्रता आई है और आपदा आने के दूसरे दिन भी पीड़ितों को समय पर आवश्यक संसाधन उपलब्ध कराए जा रहे हैं।
पशुपालन विभाग का तत्पर योगदान
मुख्य पशु चिकित्सा अधिकारी आशीष रावत द्वारा प्रभावित गांव ताल जामण में राहत कार्यों का निरीक्षण किया गया। उन्होंने जानकारी दी कि अब तक की जानकारी के अनुसार क्षेत्र में कुल 15 पशु लापता हैं, जिनमें 1 बछिया, 3 बैल, 8 गाय एवं 3 भैंस शामिल हैं। इसके अतिरिक्त 2 पशुओं को मलबे से बाहर निकाला गया है। मौके पर ही 15 घायल पशुओं का प्राथमिक उपचार शुरू कर दिया गया है। पशु चिकित्सा विभाग की ओर से 11 सदस्यीय विशेषज्ञ दल को विभिन्न स्थानों पर भेजा गया है, जो लगातार पशुओं की देखरेख व इलाज का कार्य कर रहे हैं।
मानव जीवन की सुरक्षा प्राथमिकता
छेनागाड़ क्षेत्र में हालात अधिक गंभीर पाए गए हैं। नोडल अधिकारी एवं जिला पंचायत राज अधिकारी प्रेम सिंह रावत ने बताया कि क्षेत्र में 8 व्यक्ति लापता हैं, जिनकी खोजबीन के लिए रेस्क्यू टीमें लगातार प्रयासरत हैं। प्रशासन द्वारा 2 घायलों को तत्काल उपचार प्रदान किया गया है। अधिकारी ने बताया कि उन्होंने क्षेत्र के विद्यालय भवन, आवासीय भवनों और गोशालाओं का निरीक्षण किया और नुकसान का जायजा लिया।
ऊर्जा विभाग की तत्परता
आपदा के कारण ताल जामण और डूंगर गांवों में विद्युत आपूर्ति बाधित हो गई थी। ऐसी स्थिति में उरेडा विभाग द्वारा त्वरित कार्रवाई करते हुए ताल जामण में 15 सोलर लाइट और डूंगर में 10 सोलर लाइट वितरित की गईं, जिससे इन गांवों में प्रकाश व्यवस्था सुनिश्चित की जा सकी है।इसके साथ ही विद्युत विभाग विद्युत आपूर्ति करने के लिए तेजी के साथ कार्य सुरु कर रहा है।
खाद्य आपूर्ति एवं राहत सामग्री का वितरण
जिला पूर्ति अधिकारी के.एस. कोहली ने बताया कि ताल जामण क्षेत्र में प्रशासन द्वारा तत्काल प्रभाव से 25 खाद्यान्न पैकेट, 5000 पानी की बोतलें, 5000 नमकीन पैकेट एवं 250 अतिरिक्त राशन किट प्रभावित परिवारों के लिए भेजी गई हैं। उन्होंने यह भी आश्वस्त किया कि आवश्यकता पड़ने पर आगे भी राहत सामग्री भेजी जाती रहेगी ताकि किसी भी परिवार को संकट की घड़ी में भोजन एवं जल की कमी ना हो।