राजकीय स्नातकोत्तर महाविद्यालय में हुआ चित्रकला प्रतियोगिता का आयोजन

by intelliberindia
 
कोटद्वार । राजकीय स्नातकोत्तर महाविद्यालय के चित्रकला विभाग में शनिवार को विश्व कला दिवस के अवसर पर आईक्यूएसी प्रकोष्ठ एवं चित्रकला विभाग के संयुक्त तत्वावधान में एक  चित्रकला प्रतियोगिता का आयोजन किया गया। जिसमें चित्रकला विभाग के छात्र-छात्राओं ने बढ़-चढ़कर प्रतिभाग किया। छात्र, छात्राओं ने विश्व प्रसिद्ध चित्रकारों की कृतियों की अनुकृति शीर्षक पर आधारित खूबसूरत चित्रों का सृजन किया। प्रतियोगिता में छात्र-छात्राओं ने विश्व के सुप्रसिद्ध चित्रकारों की कृतियों को पुनः प्रस्तुत किया। प्रतियोगिता के पश्चात छात्र, छात्राओं के चित्रों की प्रदर्शनी भी आयोजित की गई। प्रतियोगिता में अतुल्या द्विवेदी बीए प्रथम सेमेस्टर ने प्रथम, गौरव बीए प्रथम सेमेस्टर ने द्वितीय, सिमरन बिष्ट बीए द्वितीय सेमेस्टर ने तृतीय स्थान तथा दीपक कोटनाला बीए प्रथम सेमेस्टर ने सांत्वना पुरस्कार प्राप्त किया। प्रतियोगिता के संयोजक एवं विभागाध्यक्ष डॉ. विनोद सिंह ने छात्र-छात्राओं को विश्व कला दिवस की बधाई दी एवं उन्हें विश्व के श्रेष्ठ कलाकारों के कार्यों से प्रेरणा लेने को कहा एवं बताया कि किस प्रकार उनके कार्यों से सीख कर वे भी एक उत्कृष्ट चित्रकार बन सकते हैं ।
महाविद्यालय के प्रभारी प्राचार्य डॉ अभिषेक गोयल ने छात्र, छात्राओं को बताया कि विश्व के श्रेष्ठ एवं स्थापित कलाकारों के कार्यों से किस प्रकार आज के बच्चों को सीखना चाहिए, उनकी कला एवं तकनीक का गहन अध्ययन करना चाहिए जिससे कि उनकी कला का सर्वांगीण विकास हो सके । उन्होंने बताया कि कला एक साधना है जिसमें हम निरंतर कठिन अभ्यास से ही सफल हो सकते हैं। उन्होंने बताया कि चित्र एक भाषा है, अतः कोई भी कृति तभी सफल होती है जब वह उसमें निहित भाव की अभिव्यक्ति करने में सफल हो। प्राचार्य ने सभी विजेता छात्र, छात्राओं को बधाई एवं शुभकामनाएं दी तथा विश्व कला दिवस के अवसर पर भविष्य में भी इसी प्रकार के कार्यक्रमों हेतु उन्हें प्रोत्साहित किया। इस अवसर पर डॉ सीमा चौधरी, डॉ संजीव कुमार, डॉ शोभा रावत, डॉ सुनीता नेगी, डॉ अमित गौड़ तथा आईक्यूएसी प्रकोष्ठ के सभी सदस्य, डॉ प्रवीण जोशी, डॉ योगिता, डॉ तनु मित्तल, डॉ एसके गुप्ता, डॉ नीता भट्ट, डॉ प्रियंका अग्रवाल, डॉ रंजना सिंह, डॉ मीनाक्षी वर्मा, डॉ मुकेश रावत आदि प्राध्यापक उपस्थित रहे।

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